अगर ये दौर जी लिया तो जीत लूंगा सबको
अब कोई दरवाजा बचा नहीं जिसे ठकठकाने की हिम्मत जुट पाएगी। कुमार प्रभाष को एक बार फिर से मैसेज किया। उन्होने सीवी मांगा। दिल्ली से लेकर मुंबई तक सीवी मांगने या भेजने का क्या मतलब होता है, पता है। जिसे कुछ करना होता है या जो कर पाता है वह सीवी नहीं मांगता।
तनाव इतना हावी है कि सीवी बनाने तक की क्षमता मस्तिष्क मे नहीं बची है। फ्री की वेबसाईट आजकल नहीं है, फिर भी मैंने एक रेंडम वेबसाईट की मदद ली। प्रिंट आऊट के समय जब पेमेंट करने के लिए कहा गया तो इस बार मैं तैयार था। इतना तैयार कि जब क्रेडिट कार्ड से इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन एक्टिवेट करने की शर्त रखी गई तो मैंने वह भी कर दिया। हर कीमत पर मुक्ति चाहिए। जोखिम बड़ा ही तो है, छोटा कब रहा है।
आगे क्या होगा पता नहीं।
आज का अंधेरा बहुत भयानक था। इतना भयानक कि सवेरे लगा कि आज का सूरज आखिरी सूरज है। घर में कोई प्रेत का वास है ऐसा लगता है। कोई इधर से उधर खींचता है तो कोई उधर से इधर। किसी ओर चलते हुए अचानक लगता है कि पीछे कोई काम छूट गया। पीछे पलट कर फिर लगता है कि अरे इधर ये छूट गया। आज अति हो चुका। धम्म से बैठकर कई बार रोने को जी चाहा। मर जाने को जी चाहा। सबकुछ बिखरा देखकर रोना आया लेकिन आवाज कहां तक जाएगी। कोई तो नहीं है। भाग्य वहां है। पिता जी रहे नहीं। दीदी अब आगे निकल चुकी और सबकुछ बदलता जा रहा है। कोई अगर कहीं छूटा हुआ है जो चीख रहा है तो वह मेरी नजर में मैं ही हूं। अब वक्त ऐसा नहीं रहा कि अपनी बात किसी को कही जाए, क्योंकि हर कोई अपनी समस्याओं से जूझ रहा है, कौन किसे क्या कहे।
कल अमिताभ बच्चन का कौन बनेगा करोड़पति का एक छोटा क्लिप देखा जिसमें सामने सुप्रीम कोर्ट का जज बैठा हुआ था। महज छब्बीस साल का लड़का। उसने दो बार यूपीएससी के इंटरव्यू तक गया था। मनीषा प्रकाश भी तो रिजाइन कर दी। हिमांशु ने भी शायद ये नौकरी छोड़ दी। फिर मैं क्यूं परेशान हो रहा हूं। शायद इसलिए कि इतना अकेला हूं या फिर इसलिए कि किसी इनकंपिटेंट के अंदर काम कर रहा हूं।
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